करोना के चलते देश मे जब लॉक डाउन लगा तो शेयर मार्किट धडाम से गिरा था. तब कई लोगो के पैसे डूब गए. लेकिन कुछ लोग होंगे जो कैश पर बैठे होंगे ( जिनके पास कैश होगा) उन्होंने क्रेश के बाद जो पैसा लगाया आज उनका पैसा 3X याने तिन या चार गुना बढ़ा है. वारेन बफेट जो की शेयर मार्किट के गुरु कहे जाते है उनका भी यही कहना है की जब लोग मार्किट मे डर के भागने लगते है तभी मौका होता है पैसा लगाने का. चढ़ते मार्किट मे पैसा लगाना मतलब बेवकूफी है.

लेकिन मार्किट कब गिरेगा और कब चढ़ेगा (टॉप और बॉटम) ये तो कोई प्रेडिक्ट कर नहीं सकता. कुछ लोग मूविंग एवरेज का सहारा लेते है तो कोई किसी थ्योरी का. समझदारी इसी मे है की बुरे वक़्त के लिए हाथमे पैसा रखें.

जब मार्किट गिर रहा होता है तो हमें सिप मोड पर अछे अछे शेयर्स को एकुमिलेट करते रहना चाहिए.

शेयर मार्किट धडाम होते दिखे तब क्या करें

अछे और प्रोफिटेबल कंपनी के शेयर्स को उठाते रहने मे कोई बुराइ नहीं है. हा एक कंपनी के ही सब शेयर्स लेने से जरुर बचे. हर सेगमेंट मे अछि अच्छी कंपनी जरुर होती है उन कंपनी की अछे से स्टडी करें और उनको चुने. कुछ लोग तो डीप मार्किट को डिस्काउंट ऑफर की तरह से लेते है.

अब अच्छी कंपनी कैसे पहचाने यह भी सवाल हो सकता है. कई लोग 4 साल तक लगातार सेल्स ग्रोथ और प्रॉफिट ग्रोथ पर नजर रखते है तो कई लोग कंपनी के मैनेजमेंट पर भरोसा करते है. कम्पनी के ऊपर डेब्ट कितना है यह भी जरुर देख्नना चाहिए. लेकिन मेरा मानना है के कम्पनी अच्छी ग्रोथ ओरिएंटेड है तो डेब्ट मायने नहीं रखता. कई लोगो का मानना होता है की फ्यूचर मे इस सेगमेंट का बोलबाला होगा. जैसे टाटा power oct 2021 से अब तक का चार्ट आप खुद ही देख सकते है

अदानी power के केस मे भी हम देख सकते है. हलाकि अदानी के मामले मे हिडेनबुर्ग के खुलासे से शेयर प्राइस मे बहोत गिरावट आई थी. लेकिन प्राइस फिर से संभालती दिखाई दे रही है.

adani-power

जैसे की इलेक्ट्रिक व्हीकल के बारे मे लोग अति उस्ताहित थे अभी भी है. इसलिए टाटा मोटर्स, महिंद्रा जैसे ऑटो कंपनी दूसरी तरफ इलेक्ट्रिक व्हीकल के रिलेटेड IT सेक्टर के लिए KPIT tech और tech महिंद्रा को लोग अकुमलेट कर रहे है. बैटरी वाली कंपनी पर भी कुछ लोगो पैनी नजर है उनमे Exide Industries जैसी कंपनी है.

ऐसे बहोत सारे बदलाव वक़्त के साथ होते रहते है. हाल के दिनों मे मिडिल ईस्ट क्राइसिस देखने को मिल रहा है. इससे आयल उत्पादक देशो मे हल चल दिख रही है. अगर युद्ध ज्यादा दिन खिचता है या ज्यादे पैमाने पर फैलता है तो आयल प्राइस पर दबाव देखने को मिलेगा. इस वजह से आयल रिलेटेड कम्पनीज पर इफेक्ट देखने को मिलेगा जिसमे आयल की कंपनी तो होगी ही और भी जैसे केमिकल इंडस्ट्रीज एशियन पेंट, बेर्गेर पेंट कुछ टायर कम्पनी जैसे MRF, BKT, APPOLO इन पर नज़र रख सकते है.

ASIAN

आशा करता हु ये मेरा बाजार के रुझान को लेकर नजरिया आप को पसंद आया होगा. कुछ और जानकारी चाहिए तो कमेंट करके आप मुझसे पुछ सकते है. इस आर्टिकल को शेयर कर सकते है.

आपके सवालो के जवाब

#1. शेयर खरीदते समय क्या ध्यान रखना चाहिए?

4 साल तक लगातार सेल्स ग्रोथ और प्रॉफिट ग्रोथ पर नजर रखते है तो कई लोग कंपनी के मैनेजमेंट पर भरोसा करते है. कम्पनी के ऊपर डेब्ट कितना है यह भी जरुर देख्नना चाहिए. लेकिन मेरा मानना है के कम्पनी अच्छी ग्रोथ ओरिएंटेड है तो डेब्ट मायने नहीं रखता.

#2. इंडिया में कितने पर्सेंट लोग शेयर मार्केट में इन्वेस्ट करते हैं?

देखा गया है की इंडिया मे बहोत कम इक्विटी मार्किट मे इन्वेस्ट करते है अंदाजा है के 7 से 8% तक हो. हाल ही मे रिटेल इन्वेस्टर का रुझान मार्किट की तरफ जरुर बढ़ा भी है.